Swayam me anekon kamiyan hone ke bavjood mai apne aap se itna pyaar kar sakta hun

to fir doosron me thodi bahut kamiyon ko dekhkar unse ghrina kaisi kar sakta hun-

anmol vachan, Swami Vivekanand Ji


Friday, 19 June 2015

He Devki Nandan,Jasomati Lal Kanhaiya.(हे देवकी नंदन जशोमति लाल कन्हैया)।

मेरा बाँका कन्हैया, दुलारा कन्हैया, 
    सबकी आँखों का तारा कन्हैया।
हे देवकी नंदन, जशोमति लाल कन्हैया।

मैं जी रही थी जीवन। कुछ इस तरह अपनी,
    उदास और निराशा भरी,बेनाम जिन्दगी।
 थाम कर ऊँगली मेरी, मुझे आगे को बढ़ाया ,
   मेंरे थके हुये जीवन में,फिर से बहार आया।
 तुम्हारी एक नज़र ही मुझको जीवन में ख़ुशी देती है,
     मैं क्या कहूँ ,कि तुम मेरे क्या हो कन्हैया ।

 जबसे मेरे जीवन में तुम, आये हो कन्हैया,
थाम कर पतवार तुम चला रहे हो मेरी नैया।
एहसास जब होता है मुझे, आँखे नम हो जाती मेरी,
मैं नहीं मेरे आँखों की अश्रु,बयाँ सब कुछ कर जाती है।
 तुम्हीं मेरे सच्चे मीत हो कन्हैया,
  मैं क्या कहूँ कि तुम मेरे ,क्या हो कन्हैया।
    हे देवकी नंदन, जशोमति लाल कन्हैया।





 



Par Bhav Se Utar Jayega.(पार भव से उतर जाएगा)।

राम कहने से तर जाएगा , 
पार भव से उतर जाएगा ।

     होगी घर-घर में चर्चा तेरी-२
    तू जिस गली से गुज़र जाएगा।
        राम कहने से तर जाएगा ,
        पार भव से उतर जाएगा ।

    बड़ी मुश्किल से नर तन मिला-२
     क्या पता फिर किधर जाएगा ।
   राम कहने...........................।

        जग कहेगा कहानी तेरी ,-२
       काम ऐसा तू कर जाएगा ।
        राम कहने ......................।

        इनके आगे तू झोली फैला-२
        दाता झोली को भर जाएगा ।
        राम कहने से तर जाएगा ,
        पार भव से उतर जाएगा ।

   

Wednesday, 17 June 2015

Mera Shri Vaisnav Parivar Hari Aa jao Ek Bar.

मेरा श्री वैष्णव परिवार , हरि आ जाओ एक बार,
हरि आ जाओ ,हरि आ जाओ हरि आ जाओ एक बार।

मेरी नैया पार लगा जाओ,मेरी बिगड़ी बात बना जाओ।
     नित आत्मा करे पुकार,हरि आ जाओ एक बार ।
  मेरा छोटा सा वैष्णव परिवार,हरि आ जाओ एक बार।

 लाखों को दरश दिखाया है,प्रभु मुझको क्यों विसराया है।
   ये कैसी तुम्हारी माया है,नित बहती अँसुवन धार ।
    हरि आ जाओ एक बार, प्रभु आ जाओ एक बार ।

   जब याद तुम्हारी आती है,तन मन की सुध विसराती है।
   रह-रहकर मुझे तड़पाती है,तन मन धन सब दूँ बार।
  हरि आ जाओ एक बार,..................

  तुम से विछड़े युग बीत गये,मुझसे हरि क्यों तुम रूठ गये।
     मैं हार गया, तुम जीत गये,अब दर्शन दो साकार ।
  हरि आ जाओ एक बार, मेरा श्री वैष्णव परिवार।
 हरि आ जाओ.................................।

Monday, 8 June 2015

Shri Man Narayan (श्री मन नारायण ।)

श्रीमन नारायण नारायण नारायण ,
 लक्ष्मी नारायण नारायण नारायण ।
  जपो अखंड जी, भजो अखंड जी,
श्रीमन नारायण नारायण नारायण।

शिव सनकादिक,आदि ब्रह्मादिक,
   सुमिर-सुमिर भये पारायण ।श्रीमन

     विष्णु-पुराण भागवत-गीता ,
     वाल्मीकि जी की रामायण ।श्रीमन

      जो नारायण नाम हैं लेते ,
    तो पाप दु:खों का होत निवारण।
श्रीमन........................।

 जो कोई भक्ति करे माधव की,
 तो मात - पिता कुल तारायण।
श्रीमन ........................... ।

  माधव दास ,आस रघुवर की,
 भव सागर भये पारायण,नारायण।
श्रीमन नारायण नारायण नारायण,
भजो नारायण नारायण नारायण।

Friday, 5 June 2015

AAya Shawla Sarkar Haste-Haste (आया साँवला सरकार हँसते-हँसते)।

आई बहार हँसते-हँसते, आया साँवला सरकार हँसते-हँसते।

   परम अनूप आया, त्रिभुवन का भूप आया ।
   रघुवर सरताज हँसते-हँसते, आया साँवला सरकार हँसते-हँसते।आईबहार ...
  
   नाथों का नाथ आया, करने सनाथ आया ।
     श्रृष्टि सुधार हँसते-हँसते ,
   आया साँवला सरकार हँसते-हँसते ।आई बहार।

  भरत जी का भाई आया , जनकजी का जमाई आया।
     मिथिला का श्रृंगार हँसते-हँसते ।
  आया साँवला सरकार हँसते-हँसते ।आई बहार ।

 प्रगटे अवध में आके, कौशल्या के लाल कहाके।
 दशरथ कुमार हँसते-हँसते ।
 आया साँवला सरकार हँसते-हँसते ।
आई बहार हँसते-हँसते , आया साँवला सरकार हँसते-हँसते।
 
      
 

    

Wednesday, 3 June 2015

SHRI RaMAYANJEE KI AARTI ( श्री रामायणजी की आरती )।



आरति     श्री रामायणजी      की। 

कीरति  कलित     ललित     सिय   पी   की ।।

गावत    ब्रह्मादिक   मुनि    नारद    ।

बालमीक      बिग्यान    बिसारद  ।।

सुक     सनकादि     सेष     अरु     सारद ।

बरनि  पवनसुत     कीरति    नीकी   ।। आरति ।

   गावत    बेद     पुरान    अष्टदस    ।

   छओ     सास्त्र     सब     ग्रंथन   को    रस।।
   
   मुनि     जन    धन     संतन   को    सरबस  ।

     सार    अंस    संमत  सबहीं    की     । आरति ।

    गावत    संतत     संभु     भवानी     ।

   अरु       घटसंभव     मुनि     बिग्यानी   ।।

   ब्यास     आदि     कबिबर्ज    बखानी    ।

 कागभुसुंडि      गरुड़     के     ही      की ।। आरति ।

  कलि     मल     हरनि    बिषय   रस   फीकी ।

    सुभग      सिंगार      मुक्ति     जुबती      की ।।

    दलन     रोग     भव    मूरि     अमी     की ।

  तात   मात     सब    बिधि     तुलसी      की ।।आरति ।




  



Tuesday, 2 June 2015

Nam Tumhara TaranHara ( नाम तुम्हारा तारणहारा )।

नाम तुम्हारा तारण हारा, कब तेरा दर्शन होगा,
जिसकी रचना इतनी सुंदर , वो कितना सुंदर होगा।
नाम तुम्हारा...........................................

सुर नर मुनि जन जिन चरणों में निश दिन ध्यान लगाते हैं,
जो भी तुम्हारे दर पे आते हैं , मन वाँछित फल पाते हैं,
    आत्म निधि को पाने हेतु, दर पे तेरे आना होगा ,
जिसकी रचना इतनी सुंदर , वो कितना सुंदर होगा ।
नाम तुम्हारा..................................................।

दीन दयाल दया के सागर , जग में तुम्हारा नाम है ,
तुम बिन मेरे बालकृष्ण अब , कोई नहीं हमारा है ,
(आत्मनिधि को पाने हेतु )भवसागर पार करने हेतु तेरा ही शरणा होगा ,
जिसकी रचना इतनी सुंदर , वो कितना सुंदर होगा ।
नाम तुम्हारा..................................................।