Swayam me anekon kamiyan hone ke bavjood mai apne aap se itna pyaar kar sakta hun

to fir doosron me thodi bahut kamiyon ko dekhkar unse ghrina kaisi kar sakta hun-

anmol vachan, Swami Vivekanand Ji


Saturday, 24 September 2016

Ki Jane Kaun Se Gun Par ,DayaNinidhi Reejh Jate Hai.( कि जाने कौन से गुण पर,दयानिधि रीझ जाते हैं।)


कि जाने कौन से गुण पर, दयानिधि रीझ जाते हैं।
यही सद् ग्रंथ कहते  हैं, यही हरि भक्त गाते हैं  ।
कि जाने कौन-------- ---------------------।

नहीं स्वीकार करते हैं, निमंत्रण नृप दुर्योधन का।
विदुर के घर पहुँचकर, भोग छिलकों का लगाते हैं।
कि जाने कौन से ------------------------------।

न आये मधुपुरी से गोपियों की, दु: ख कथा सुनकर।
द्रुपदजा की दशा पर,  द्वारका से दौड़े  आते हैं  ।
कि जाने कौन से------------------------------- 

न रोये बन गमन में , श्री पिता की वेदनाओं पर ।
उठा कर गीध को निज गोद में , आँसु बहाते हैं ।
कि जाने कौन से------------------------------ ।

कठिनता से चरण धोकर , मिले कुछ 'बिन्दु' विधि हर को
वो चरणोदक स्वयं केवट के , घर जाकर लुटाते हैं।
कि जाने कौन से------------------------------------- ।

Sunday, 28 August 2016

Jaimal Ki Pad Sevan Bhakti. ( जयमल की पाद सेवन भक्ति ।)

एक जयमल नाम के प्रभु चरणों के अनुरागी भक्त थे।वे अपने घर के ऊपर के कमरे में प्रभु की चरण सेवा किया करते थे।प्रभु उनकी अटूट प्रेम भक्ति से प्रसन्न होकर रात्रि के समय रोज दर्शन देने लगे।भक्त जयमल भी बड़े प्रेम से प्रभु की चरण सेवा करने लगे और अपनी पत्नी के पास जाना भूल गये।पत्नी सोंच में पड़ गई कि उनके पति आजकल कहाँ जाने लग गये हैं? दूसरे दिन उनकी पत्नी ने सोंचा आज मैं देखती हूँ ये कहाँ जाते हैं और यही सोंचकर उसने अपने पति का रात में पीछा किया तो देखती है पतिदेव साक्षात प्रभु की सेवा करने में मग्न हैं। प्रभु के दर्शन पाकर वो स्वयं भी मंत्रमुग्ध हो गई और प्रभु के चरणों में गिर गई। प्रभु दोनों को भक्ति का आशीर्वाद देकर अन्तर्धान हो गये।
   

Saturday, 6 August 2016

Bhakt aur bhagwan ke beech madhur Vinod

श्रीकृष्ण भगवान का एक बहुत ही प्यारा भक्त था, जिसका नाम अहमदशाह था।अहमद को भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन होते रहते थे।उन्हें प्रभु की अहैतुकी कृपा प्राप्त होती रहती थी।भगवान अपने भक्त के साथ कभी-कभी मधुर विनोद भी किया करते थे।एक दिन अहमदशाह अपनी लम्बी टोपी पहन कर भगवान के ध्यान में बैठे थे ।भगवान को उनकी टोपी देखकर हँसी सूझी।वे उनके पास प्रकट होकर बोले---- "अहमद ! मेरे हाथ अपनी टोपी बेचोगे क्या ?" अहमद श्रीकृष्ण की बात सुनकर प्रेम से भर गये, पर उन्हें भी विनोद सूझा।अहमद ने कहा ---"चलो हटो , दाम ( कीमत )देने के लिये तो कुछ है नहीं और अाये हैं टोपी खरीदने!" अब प्रभु को इस विनोद में आनंद आने लगा था उन्होंने कहा "नहीं जी , मेरे पास बहुत कुछ है !" अहमद ने कहा "बहुत कुछ क्या है, लोक - परलोक की समस्त सम्पत्ति ही तो आपके पास है, पर यह सब लेकर मैं क्या करूँगा ?"
                भगवान ने कहा---- "देखो अहमद! यदि तुम मेरी इस प्रकार उपेक्षा करोगे तो मैं संसार में तुम्हारा मूल्य घटा दूँगा।तुम्हें लोग इसलिये पूछते हैं, तुम्हारा आदर करते हैं कि तुम मेरे भक्त हो और मैं भक्त के हृदय में निवास करता हूँ। किन्तु अब मैं सभी से कह दूँगा कि अहमद मेरी हँसी उड़ाता है , इसलिये तुमलोग उसका आदर मत करना।फिर संसार का कोई व्यक्ति तुम्हें आदर नहीं करेगा।" अब तो अहमद भी बड़े तपाक से बोले ---- "अच्छा जी ! मुझे दुनिया का डर दिखा रहे हो ! यदि आप मेरा मूल्य घटा दोगे तो मैं भी आपका मूल्य घटा दूँगा।मैं सबसे कह दूँगा कि भगवान् बहुत सस्ते मिल सकते हैं , वे सर्वत्र रहते हैं , सबके हृदय मे निवास करते हैं।जो कोई उन्हें अपने हृदय में झाँककर देखना चाहेगा , उसे वो वहीं मिल सकते हैं ,कही जाने की जरूरत नहीं है।फिर लोगों में आपका सम्मान भी कम हो जायेगा।"
                             भगवान हँसे और अहमद से बोले "तुम जीते और मैं अपने भक्त से हारकर भी खुश हूँ।" यह कह कर प्रभु अन्तर्धान हो गये।अहमद पुन: प्रभु के ध्यान में लग गये।

Monday, 20 June 2016

Shree Krishna Stuti (श्री कृष्ण स्तुति ) ।



              
 

श्री कृष्णचन्द्र कृपालु भजु मन, नन्द नन्दन यदुवरम् ।
                  आनन्दमय सुखराशि ब्रजपति, भक्तजन संकटहरम् ।
सिर मुकुट कुण्डल तिलक उर, बनमाल कौस्तुभ सुन्दरम् ।
                     आजानु भुज पट पीत धर, कर लकुटि मुख मुरली धरम् ।
बृष भानुजा सह राजहिं प्रिय , सुमन सुभव सिंहासनम् ।
                       ललितादि सखिजन सेवहिं, लिए छत्र चामर व्यंजनम् ।
पूतना-तृण-शंकट-अधबक , केशि-व्योम-विमर्दनम् ।
                        रजक-गज-चाणूर-मुष्टिक , दुष्ट कंस निकन्दनम् ।
गो-गोप गोपीजन सुखद , कालीय विषधर गंजनम् ।
                         भव-भय हरण अशरणशरण , ब्रह्मादि मुनि-मन रंजनम् ।
श्याम-श्यामा करत केलि , कालिन्दी तट नट नागरम् ।
                           सोइ रूप मम हिय बसहुँ नित , आनन्दघन सुख सागरम् ।
इति वदति सन्त सुजान श्री सनकादि मुनिजन सेवितम् ।
                           भव-मोतिहर मन दीनबन्धो , जयति जय सर्वेश्वरम् ।

Tuesday, 31 May 2016

ShreeKrishnashtakam ( श्रीकृष्णाष्टकम् )




भजे  व्रजैकमण्डनं   समस्तपापखण्डनं 
 स्वभक्तचित्तरंजनं  सदैव  नन्दनन्दनम् ।
सुपिच्छगुच्छमस्तकं  सुनादवेणुहस्तकं
ह्वानंगरंगसागरं   नमामि    कृष्णनागरम्  ।। १  ।।

मनोजगर्वमोचनं      विशाललोललोचनं
विधूतगोपशोचनं   नमामि  पद्मलोचनम् ।
करारविन्दभूधरं        स्मितावलोकसुन्दरं 
महेन्द्रमानदारणं   नमामि   कृष्णवारणम्  ।।२ ।।

कदम्बसूनूकुण्डलं    सुचारुगण्डमण्डलं
व्रजांगनैकवल्लभं  नमामि  कृष्ण दुर्लभम् ।
यशोदया  समोदया सगोपया  सनन्दया 
युतं  सुखैकदायकं नमामि  गोपनायकम्  ।।३ ।।

सदैव  पादपंकजं   मदीयमानसे   निजं
दधानमुत्तमालकं  नमामि  नन्दबालकम् ।
समस्तदोषशोषणं    समस्तलोकपोषणं
समस्तगोपमानसं नमामि  कृष्णलालसम् ।।४ ।।

भुवो   भरावतारकं   भवाब्धिकर्णधारकं
यशोमतीकिशोरकं  नमामि  दुग्धचोरकम्।
दृगन्तकान्तभंगिनं       सदासुबालसंगिनं
दिने  दिने  नवं  नवं  नमामि  नन्दसंभवम् ।।५ ।।

गुणाकरं   सुखाकरं   कृपाकरं   कृपावरं
सुरद्विषन्निकन्दनं   नमामि   गोपनन्दनम् ।
नवीनगोपनागरं        नवीनकेलिलम्पटं
नमामि  मेघसुन्दरं    तडित्प्रभालमत्पटम् ।।६ ।।

समस्तगोपनन्दनं       हृदम्बुजैकमोहनं
नमामि   कुंजमध्यगं   प्रसन्नभानुशोभनम् ।
निकामकामदायकं     दृगन्तचारूसायकं
रसालवेणुगायकं   नमामि  कुंजनायकम् ।।७ ।।

विदग्धगोपिकामनोमनोज्ञतल्पशायिनं
नमामि  कुंजकानने  प्रवृद्धवह्निपायिनम्।
यदा तदा यथा तथा तथैव  कृष्णसत्कथा
मया सदैव गीयतां तथा कृपा विघीयताम् ।
प्रमाणिकाष्टकद्वयं     जपत्यधीत्य   य: 
पुमान्भवेत्स  नन्दनन्दने  भवे  भवे  सुभक्तिमान् ।।८ ।।



Wednesday, 18 May 2016

दादी या नानी माँ के घरेलू प्राथमिक उपचार

(इलायची का उपयोग)  १-   मुँह में छाले हो तो इलायची को पीसकर उसमें शहद मिलाकर लगाने से छाले ठीक होते हैं।

२-   २-३  ग्राम इलायची को पीसकर मिश्री मिलाकर लेने से पेशाब कम अाना या जलन होने की समस्या में शीघ्र लाभ होता है।

३-     हिचकी नहीं रुक रही हो तो २ इलायची व ३ लौंग को पानी में चाय की तरह थोड़ी देर उबाल कर पिलाने से लाभ होता है।यदि एक बार में ठीक नहीं हुआ तो यह प्रयोग दिन में ३-४ बार कर सकते हैं।

(काली मिर्च )-----१-  यदि खाँसी के कारण सो नहीं पा रहे हैं तो १-२ काली मिर्च मुँह में रखकर चूसते रहने से खाँसी में आराम हो जायेगा तथा नींद भी आ जायेगी।

२-      थोड़ा अदरक व ३-४ काली मिर्च मिलाकर काढ़ा बनाकर पीने से खाँसी में तुरन्त आराम होता है।

३--    शीतपित्त होने पर ४-५ कालीमिर्च पीसकर उसमें १ चम्मच गर्म घी और शक्कर मिलाकर पिलाने से लाभ होता है।

४--   खाँसी व उसके साथ कमजोरी भी हो तो २० ग्राम कालीमिर्च, १०० ग्राम बादाम , १५० ग्राम मिश्री मिलाकर कूटकर पाउडर बनाकर किसी साफ शीशी में भरकर रख लें, सुबह - शाम गर्म दूध के साथ अथवा गर्म पानी से लेने से पुरानी खाँसी भी ठीक हो जाती है।इससे कमजोरी में भी लाभ होता है।


(मेथी का उपयोग-)-------

१-     एक चम्मच मेथी को एक कप पानी में भिगो दें। प्रात: उस पानी को पीकर मेथी को भी चबाकर खायें।मधुमेह में इससे लाभ होगा व इससे होने वाली कमजोरी, वातरोगों व हृदयरोग में भी फायदा होगा।

२---- मेथी , हल्दी  तथा सौंठ को बराबर मात्रा में लेकर पाउडर करके रखें। १-१ चम्मच सुबह -शाम गर्म पानी या गर्म दूध के साथ लेनें से जोड़ों के दर्द या सभी तरह के वात रोग या सूजन में लाभ होता है।

३---     पुराने अर्थराइटिस के रोगियों को लम्बे समय तक मेथी का प्रयोग करने से चमत्कारी लाभ होता है।

४---  आर्थराइटिस व मधुमेह के रोगियों को मेथी को अंकुरित करके भी प्रतिदिन सेवन करने से लाभ मिलता है।

५---  सर्दी तथा कफ में मेथी एवं अदरक का काढ़ा बनाकर पीने से लाभ होता है।


(अदरक का प्रयोग-)----- 

१--  भोजन के आरंभ में ३-४ छोटे टुकड़े अदरक लेने से भूख बढ़ती है तथा भोजन के पश्चात लेने से भोजन पचता है।

२--- २ चम्मच अदरक के रस में थोड़ा शहद मिलाकर लेने से सर्दी जुकाम एवं खाँसी में फायदा मिलता है।

३-----  यदि ठंढ से दाँत में दर्द हो तो एक टुकड़ा अदरक को दाँत में दबाकर रखने से तुरन्त लाभ मिलेगा।

४------  अदरक को भूनकर चूसने से खाँसी में लाभ होता है।

५-------   २-३ ग्राम सौंठ पाउडर में१/२ या १ ग्राम दालचीनी मिलाकर दूध या पानी के साथ लेने से पाचन ठीक रहता है तथा हृदय को ताकत मिलता है।

६------   अदरक के रस में नींबू का रस मिलाकर पीने से मन्दाग्नि दूर होकर भूख लगती है।

७-------  २ ग्लास पानी में ५ ग्राम अदरक कूटकर उबालकर उसमें नींबू का रस तथा थोड़ा शहद डालकर सुबह खाली पेट गुनगुना पीने से मोटापा कम होता है।

Tuesday, 17 May 2016

Jhanki Karne ko Aaj , Mai ShreeJee Ke Dwar Chali.


सपने को साकार बनाया, करके कृपा मुझे पास बुलाया ,
मुझ अनाथ को श्रीनाथ ने ,  देकर  प्रेम सनाथ बनाया ,
अपने पतिदेव के साथ चली ,   मेरी नैया पार लगी ।
झाँकी करने को आज मैं ,  श्रीजी के द्वार चली ।
बहुत दिनों के बाद ,       मेंरी    तकदीर  खुली  ,
झाँकी करने को आज ,  मैं श्रीजी के द्वार चली ।
गिरिराज धरण प्रभु तेरी शरण-------------------।

मोर चन्द्रिका शीश पे सोहे , श्याम छवि सब का मन मोहे ,
मुझे हाथ से पास बुलावे ,  कटी हाथ में कमल धरावे ,
मेरी नाथ  नगरिया,  प्रभु की बगिया,  महके गली - गली,
झाँकी करने को आज , मैं   श्रीजी के   द्वार चली ।
बहुत दिनों के बाद-------------------- ।
गिरिराज धरण प्रभु तेरी शरण --------------।


जाकर सन्मुख बैठ धरूँगी , निरख - निरख छवि दरश करूँगी ,
सेवा करके श्रीनाथ की    ,  जीवन अपना सफल करूँगी ,
माला भी मैं गूथूँगी  ,   चुन -  चुन कर  कली - कली ।
झाँकी करने को आज मैं ,  श्रीजी के द्वार चली ।
बहुत दिनों के बाद ----------------- ।
गिरिराज धरण प्रभु तेरी शरण -------------।