Swayam me anekon kamiyan hone ke bavjood mai apne aap se itna pyaar kar sakta hun

to fir doosron me thodi bahut kamiyon ko dekhkar unse ghrina kaisi kar sakta hun-

anmol vachan, Swami Vivekanand Ji


Monday, 16 March 2015

Mane Chakar Rakho Jee.( मने चाकर राखो जी ) (मीरा जी के भजन ) ।




  मने चाकर राखो जी, मने चाकर राखो जी।
            गिरधारीलाला चाकर राखो जी, मने चाकर राखो जी।
  
      चाकर रहसूँ ,बाग लगासूँ, नित उठि दरसन पासूँ ।
 बृंदावन की कुंज गली में, गोविन्द लीला गाँठूँ ।
      मने चाकर राखो जी, मने चाकर राखो जी ।

        चाक गली में दरसन पाऊँ, सुमिरन पाऊँ फरजी।
         भाव -भक्ति जागीरे पाऊँ , तीनों माता सरसी ।
          मने चाकर राखो जी , मने चाकर राखो जी ।

          मोर मुकुट पीताम्बर सोहे ,गले बैजन्तीमाला ।
          बृंदावन में धेनु चरावे , मोहन मुरलीवाला ।
           मने चाकर राखो जी, मने चाकर राखो जी।

          ऊँचे-ऊँचे महल बनाऊँ , बीच-बीच राखूँ बारी।
           साँवरिया के दरसन पाऊँ ,पहन कुशुमरी साड़ी।
            मने चाकर राखो जी ,मने चाकर राखो जी ।

           जोगी आया जोग करन को, तप करने सन्यासी।
            हरि भजन को साधु आये, बृंदावन के बासी ।
            मने चाकर राखो जी, मने चाकर राखो जी ।

             मीरा के प्रभु गहिर गंभीरा, रूते रहो जी धीरा ।
             आधी रात प्रभु दरसन दीनों, जमुना जी के तीरा।
             मने चाकर राखो जी, मने चाकर राखो जी।
             गिरधारी लाला , चाकर राखो जी, मने चाकर राखो जी ।