Swayam me anekon kamiyan hone ke bavjood mai apne aap se itna pyaar kar sakta hun

to fir doosron me thodi bahut kamiyon ko dekhkar unse ghrina kaisi kar sakta hun-

anmol vachan, Swami Vivekanand Ji


Saturday, 11 April 2015

Bhakt Aur Bhagwan Ke Beech Madhur Vinod . (भक्त और भगवान के बीच मधुर विनोद )।

भगवान का एक मुसलमान भक्त थे जिनका नाम अहमदशाह था ।अहमदशाह को प्रायः भगवान श्रीकृष्ण 
के दर्शन होते रहते थे।भगवान उनसे विनोद भी किया करते थे । एक दिन अहमदशाह एक बड़ी लम्बी टोपी
पहन कर बैठे हुए थे। भगवान को उनकी टोपी देखकर हँसी आ गई और उन्हें विनोद करने का ख़्याल आया।
प्रभु भक्त के पास प्रकट होकर बोले, अहमद! मेंरे हाथ अपनी टोपी बेचोगे क्या ? अहमद श्रीकृष्ण को अपने
समीप पाकर तथा उनकी बात सुनकर प्रेम से भर गए , पर उन्हें भी विनोद सूझा ।वे बोले- चलो हटो, दाम देने
के लिए तो कुछ है नहीं और आए हैं टोपी खरीदनें । भगवान ने कहा नहीं जी मेरे पास बहुत कुछ है! तब अहमद
ने कहा , बहुत कुछ क्या है , लोक परलोक की समस्त सम्पत्ति ही तो तुम्हारे पास है , पर वह लेकर मैं क्या करूँगा?
भगवान ने कहा , देखो अहमद यदि तुम इस प्रकार मेरी उपेक्षा करोगे तो मैं संसार में तुम्हारा मूल्य घटा दूँगा । तुम्हें लोग
इसलिए पूछते हैं, तुम्हारा आदर करते हैं कि तुम भक्त हो और मैं भक्त के हृदय में निवास करता हूँ । किंतु अब मैं कह दूँगा
कि अहमद मेरी हँसी उड़ाता है , उसका आदर तुम लोग मत करना । फिर संसार का कोई व्यक्ति तुम्हें नहीं पूछेगा ।
अब तो अहमद भी बड़े तपाक से बोले ,अजी मुझे क्या डर दिखाते हो ? तुम यदि मेरा मूल्य घटा दोगे तो तुम्हारा
मूल्य भी मैं घंटा दूँगा । मैं सबसे कह दूँगा कि भगवान बहुत सस्ते में मिल सकते हैं , वे सर्वत्र रहते हैं , सबके हृदय में
निवास करते हैं ।जो कोई उन्हें अपने हृदय में झाँककर देखना चाहेगा , उसे वे वहीं मिल सकते हैं, कहीं जाने की ज़रूरत नहीं ।
फिर तुम्हारा आदर भी घट जायगा ।
                         भगवान हँसे और बोले - अच्छा अहमद , न तुम्हारी , न मेंरी ठीक है ।
                           और यह कहकर भगवान अन्तर्ध्यान हो गये ,भक्त अहमद भी प्रभु के ध्यान में
                            लीन हो गये ।