Swayam me anekon kamiyan hone ke bavjood mai apne aap se itna pyaar kar sakta hun

to fir doosron me thodi bahut kamiyon ko dekhkar unse ghrina kaisi kar sakta hun-

anmol vachan, Swami Vivekanand Ji


Sunday, 11 October 2015

Aarti Shri Ambe Jee Ki ( आरती श्री अम्बे जी की )

जय अम्बे गौरी , मैया जय श्यामा गौरी ।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवजी ।। १।।जय अंबे

माँग सिन्दूर विराजत , टीको मृगमद को ।
उज्जवल से दोउ नैना , चन्द्रवदन नीको  ।।२ ।।जय अंबे

कनक समान कलेवर , रक्ताम्बर राजे  ।
रक्तपुष्प गल माला ,  कण्ठन पर साजे ।।३ ।।जय अंबे

केहरि वाहन राजत , खड़ग खप्पर धारी ।
सुर - नर - मुनि - जन सेवत , तिनके दुखहारी ।।४ ।। जय अंबे

कानन कुंडल शोभित , नासाग्रे मोती  ।
कोटिक चन्द्र दिवाकर - राजत सम ज्योति ।।५ ।। जय अंबे 

शुम्भ  निशुम्भ विडारे , महिषासुर - घाती  ।
धूम्रविलोचन  नैना   निशदिन   मदमाती  ।।६ ।। जय अंबे

चण्ड  मुण्ड  संहारे , शोणितबीज   हरे  ।
मधु  कैटभ  दोउ  मारे ,  सुर  भयहीन करे ।।७ ।। जय अंबे 

ब्रह्माणी  रुद्राणी ,  तुम  कमलारानी  ।
आगम -निगम - बखानी , तुम शिव -पटरानी ।।८ ।।जय अंबे

चौसठ योगिनी गावत ,  नृत्य करत  भैरूं। 
बाजत ताल मृदंगा,    और बाजत  डमरू ।।९ ।। जय अंबे

भुजा  अष्ट अति शोभित ,  वर मुद्रा धारी ।
मन वांछित फल पावत ,   सेवत नर - नारी ।।१० ।। जय अंबे 

तुम ही जग की माता , तुम ही हो भरता ।
भक्तन के दुख हरता , सुख सम्पत्ति करता ।।११ ।।

कंचन थाल विराजत , अगर  कपूर  बाती  ।
श्री मालकेतू में राजत , कोटि रतन ज्योति ।।१२ ।।जय अंबे

श्री अम्बेजी की आरती  जो कोई नित गावै ।
कहत शिवानन्द स्वामी ,  सुख सम्पति पावै ।।१३  ।। जय अंबे