Swayam me anekon kamiyan hone ke bavjood mai apne aap se itna pyaar kar sakta hun

to fir doosron me thodi bahut kamiyon ko dekhkar unse ghrina kaisi kar sakta hun-

anmol vachan, Swami Vivekanand Ji


Sunday, 11 October 2015

Durga Maa Se Kshama Prarthana दुर्गा माँ से क्षमा प्रार्थना

आपत्सु  मग्न:  स्मरणं  त्वदीयं ।
करोमि  दुर्गे  करूणार्णवेशि ।
नैतच्छठत्वं   मम   भावयेथा:  ।
क्षुधातृषार्ता   जननीं  स्मरन्ति  ।।

हे दुर्गे!  हे दयासागर  महेश्वरी !  जब  मैं किसी विपत्ति  में पड़ता हूँ , तो तुम्हारा ही  स्मरण करता हूँ । इसे तुम मेरी धृष्टता मत समझना , क्योंकि  भूखे - प्यासे बालक अपनी माँ को ही याद किया करते हैं ।

जगदम्ब   विचित्रमत्र  किं ,
परिपूर्णा  करूणास्ति  चेन्मयि ।
अपराधपरम्परावृतं  न   हि ।
माता  समुपेक्षते   सुतम्    ।।

हे जगज्जननी !  मुझ पर तुम्हारी पूर्ण कृपा है , इसमें आश्चर्य ही क्या है?  क्योंकि  अनेक अपराधों से युक्त पुत्र को भी माता त्याग नहीं देतीं ।

मत्सम:  पातकी  नास्ति 
पापघ्नी  त्वत्समा न  हि ।
एवं  ज्ञात्वा   महादेवी  
यथा  योग्यं  तथा  कुरू  ।।

हे महादेवी ! मेरे समान कोई पापी नहीं है , और तुम्हारे समान कोई पाप का नाश करने वाला नहीं है , यह जानकर जैसा उचित समझो माँ! वैसा ही करो ।




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