Swayam me anekon kamiyan hone ke bavjood mai apne aap se itna pyaar kar sakta hun

to fir doosron me thodi bahut kamiyon ko dekhkar unse ghrina kaisi kar sakta hun-

anmol vachan, Swami Vivekanand Ji


Thursday, 19 November 2015

भेद नहीं करता मेरा कान्हा, है परखता भाव ही।

भेद नहीं करता मेरा कान्हा, है परखता भाव ही ।

जिस हाथ से माखन खाया, उस हाथ से ही तूने माटी भी ,
जिस स्वाद से छप्पन भोग लिये, उसी स्वाद से साग और रोटी भी ,
जिस मौज से खेले ग्वाले संग , उसी मौज से मारे असुर को भी ,
भेद नहीं करता मेरा कान्हा , है परखता भाव ही।

जैसा मान दिया यशोदा माँ को , वैसे ही देवकी माँ को भी ,
जिस प्रेम से ब्याहा राधे संग, उसी प्रेम से वर ली मीरा भी ,
जैसे हृदय से लगाया पार्थ को, वैसे ही मित्र सुदामा भी ।
भेद नहीं करता मेरा कान्हा, है  परखता भाव ही ।

जिस शान से बैठे थे रथ पे, वैसे ही चराई गैया भी।
जिस शान्त चित्त से निकुंज बसे , वैसे ही रणभूमि मे भी,
जो मोक्ष दिया पांडव सेना को , वही कुरू सेना को भी ।
भेद नहीं करता मेरा कान्हा , है परखता भाव ही ।


(Kanupriya)