Swayam me anekon kamiyan hone ke bavjood mai apne aap se itna pyaar kar sakta hun

to fir doosron me thodi bahut kamiyon ko dekhkar unse ghrina kaisi kar sakta hun-

anmol vachan, Swami Vivekanand Ji


Saturday, 6 August 2016

Bhakt aur bhagwan ke beech madhur Vinod

श्रीकृष्ण भगवान का एक बहुत ही प्यारा भक्त था, जिसका नाम अहमदशाह था।अहमद को भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन होते रहते थे।उन्हें प्रभु की अहैतुकी कृपा प्राप्त होती रहती थी।भगवान अपने भक्त के साथ कभी-कभी मधुर विनोद भी किया करते थे।एक दिन अहमदशाह अपनी लम्बी टोपी पहन कर भगवान के ध्यान में बैठे थे ।भगवान को उनकी टोपी देखकर हँसी सूझी।वे उनके पास प्रकट होकर बोले---- "अहमद ! मेरे हाथ अपनी टोपी बेचोगे क्या ?" अहमद श्रीकृष्ण की बात सुनकर प्रेम से भर गये, पर उन्हें भी विनोद सूझा।अहमद ने कहा ---"चलो हटो , दाम ( कीमत )देने के लिये तो कुछ है नहीं और अाये हैं टोपी खरीदने!" अब प्रभु को इस विनोद में आनंद आने लगा था उन्होंने कहा "नहीं जी , मेरे पास बहुत कुछ है !" अहमद ने कहा "बहुत कुछ क्या है, लोक - परलोक की समस्त सम्पत्ति ही तो आपके पास है, पर यह सब लेकर मैं क्या करूँगा ?"
                भगवान ने कहा---- "देखो अहमद! यदि तुम मेरी इस प्रकार उपेक्षा करोगे तो मैं संसार में तुम्हारा मूल्य घटा दूँगा।तुम्हें लोग इसलिये पूछते हैं, तुम्हारा आदर करते हैं कि तुम मेरे भक्त हो और मैं भक्त के हृदय में निवास करता हूँ। किन्तु अब मैं सभी से कह दूँगा कि अहमद मेरी हँसी उड़ाता है , इसलिये तुमलोग उसका आदर मत करना।फिर संसार का कोई व्यक्ति तुम्हें आदर नहीं करेगा।" अब तो अहमद भी बड़े तपाक से बोले ---- "अच्छा जी ! मुझे दुनिया का डर दिखा रहे हो ! यदि आप मेरा मूल्य घटा दोगे तो मैं भी आपका मूल्य घटा दूँगा।मैं सबसे कह दूँगा कि भगवान् बहुत सस्ते मिल सकते हैं , वे सर्वत्र रहते हैं , सबके हृदय मे निवास करते हैं।जो कोई उन्हें अपने हृदय में झाँककर देखना चाहेगा , उसे वो वहीं मिल सकते हैं ,कही जाने की जरूरत नहीं है।फिर लोगों में आपका सम्मान भी कम हो जायेगा।"
                             भगवान हँसे और अहमद से बोले "तुम जीते और मैं अपने भक्त से हारकर भी खुश हूँ।" यह कह कर प्रभु अन्तर्धान हो गये।अहमद पुन: प्रभु के ध्यान में लग गये।