Swayam me anekon kamiyan hone ke bavjood mai apne aap se itna pyaar kar sakta hun

to fir doosron me thodi bahut kamiyon ko dekhkar unse ghrina kaisi kar sakta hun-

anmol vachan, Swami Vivekanand Ji


Friday, 31 March 2017

'SkandMata'Ma Durga Ka Pancham Roop



नवरात्र के पाँचवे दिन दुर्गाजी के पाँचवे स्वरूप माँ स्कंदमाता की पूजा-अर्चना की जाती है।स्कंद शिव और पार्वती के पुत्र कार्तिकेय (षडानन,अर्थात छह मुख वाले) का एक नाम है।स्कंद की माँ होने के कारण ही इनका नाम स्कंदमाता पड़ा।

               माना जाता है कि माँ दुर्गा का यह रूप अपने भक्तों की सभी मनोकामनाओं की पूर्ति करता है और उन्हें मोक्ष का मार्ग दिखाता है।माँ के इस रूप की चार भुजायें हैं।इन्होंने अपनी दाएँ तरफ की ऊपर वाली भुजा से स्कंद अर्थात् कार्तिकेयजी को पकड़ा हुआ है।इसी तरफ वाली निचली भुजा में कमल का पुष्प है।बाई ओर की ऊपर वाली भुजा में वरमुद्रा है और नीचे दूसरे हाथ में श्वेत कमल का फूल है।सिंह इनका वाहन है।यह सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी हैं।इसलिये इनके चारो ओर सूर्य सदृश अलौकिक तेजोमय मंडल सा दिखाई देता है।इन्हें कमल के आसन पर स्थित होने के कारण पद्मासना भी कहा जाता है।इनकी पूजा करने से भगवान कार्तिकेय, जो इनके पुत्र रूप मे इनकी गोद में विराजमान हैं, की भी पूजा स्वभाविक रूप से हो जाती है।मन की एकाग्रता के लिये भी देवी की कृपा विशेष रूप से फलदायी है।इनकी अराधना निम्न मंत्र से करनी चाहिये।

               सिंहासनगता  नित्यं,
                पद्माश्रितकरद्वया। 
               शुभदास्तु सदा देवी ,
                स्कंदमाता  यशस्विनी ।।

         अर्थात सिंह पर सवार रहने वाली और अपने दो हाथों में कमल का फूल धारण करने वाली यशस्विनी स्कंदमाता हमारे लिये शुभदायी हों।

Sunday, 26 March 2017

Vaishno Mata Ki Aarti


                            
                                   
            
 
भोर भई दिन चढ़ गया मेरी अम्बे , हो रही जय-जयकार 
मंदिर बिच आरती जय माँ, हे दरबारावाली आरती जय माँ ।

काहे की मैया तेरी आरती बनावाँ ,काहे दीपावाँ बीच बाती 
मंदिर बिच आरती जय माँ , सुहे चोलियाँवाली आरती जय माँ।

सर्व सोने दी तेरी आरती बनावाँ , अगर कपूर पावाँ बाती 
मंदिर बिच आरती जय माँ,जय माँ पिण्डीवाली आरती जय माँ।

कौन सुहागन दीवा वालिया मेरी मैया , कौन जागेगा सारी रात 
मंदिर बिच आरती जय माँ , सच्चियाँ जोतावाली आरती जय माँ।

सर्वसुहागन दीवा वालिया मेरी मैया, ज्योत जागेगी सारी रात
मंदिर बिच आरती जय माँ, जय माँ पहाड़ावाली आरती जय माँ ।

जुग-जुग जीवे तेरा जम्मुए द राजा , जिस तेरा भवन बनाया 
मंदिर बिच आरती जय माँ, जय माँ भवनावाली आरती जय माँ।

सिमर चरण तेरा ध्यानु यश गावे, चरणा ते जावाँ बलिहार 
मंदिर बिच आरती जय माँ ,जय माँ जोतावाली आरती जय माँ।


Friday, 24 March 2017

Aisa Pyar Baha De Maiya

 
 या देवी सर्वभूतेषू दया रूपेण संस्थिता ,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ।
     दुर्गा दुर्गति दूर कर , मंगल कर सब काज ।
    मन मंदिर उज्जवल करो , कृपा कर के आज ।।

ऐसा प्यार बहा दे मैया , चरणों से लग जाऊँ मैं ।
सब अंधकार मिटा दे मैया , दर्श तेरा कर पाऊँ मैं ।ऐसा प्यार.....

जग में आकर जग को मैया , अब तक न पहचान सका ।
क्यों आया हूँ कहाँ है जाना , ये भी न मैं जान सका ।
तू है अगम अगोचर मैया , कहो कैसे लख पाऊँ मैं । ऐसा प्यार.....

कर कृपा जगदम्ब भवानी , मैं बालक नादान हूँ 
नहीं अराधन जप तप जानूँ , मैं अवगुण की खान हूँ ।
दे ऐसा बरदान हे मैया , सुमिरन तेरा गाऊँ मैं। ऐसा प्यार.....

मैं बालक तू मैया मेरी , निशदिन तेरी ओट है ।
तेरी कृपा ही में मेरी , भीतर जो भी खोट है ।
शरण लगा लो मुझको मैया , तुझपे बलि-बलि जाऊँ मैं ।ऐसा प्यार ...




Sunday, 19 March 2017

Ambike Jagdambike Ab Tera Hi Aadhar Hai




अंबिके जगदम्बिके अब तेरा ही आधार है ,
    जिसने ध्याया तुझको मैया , उसका बेड़ा पार है।
       नंगे पग तेरे दर पे मईया अकबर आया,
        सोने  का  छत्र  माँ  उसने  चढ़ाया ।
      पूजा किया माँ उसने तेरी ,तू शक्ति का अवतार है,
    जिसने ध्याया तुझको मैया , उसका बेड़ा पार है ।अंबिके..........

पान  सुपारी  ध्वजा  नारियल लेकर भेंट चढ़ाऊँ ,
हाथ जोड़कर विनती करूँ माँ , तुझको ही मनाऊँ ।
 दर पे आये भक्तों ने बोली जय-जयकार है , 
जिसने ध्याया तुझको मैया उसका बेड़ा पार है।अंबिके.............

                 दर पे खड़े सवाली भर दे ,मेरी झोली खाली ,
                  तेरा वचन न जाये खाली , जय हो मैया शेरां वाली ,
                   कर दे कृपा मेहरां वाली , माता तू बड़ी दयाल है, 
                    जिसने ध्याया तुझको मैया , उसका बेड़ा पार है ।अंबिके..........

 धर्म भवन जागरण में मैया , तुमको आना है,
 सब  भक्तों  ने  मईया  तेरा  दर्शन पाना  है ।
  जल्दी से अब आजा मईया , तेरा इन्तजार है , 
 जिसने ध्याया तुझको मैया , उसका बेड़ा पार है ।अंबिके..................

Tuesday, 7 March 2017

संत कृपा से भव पार।




    




समर्थ गुरु रामदास बाबा एक सच्चे संत तथा हनुमानजी के भक्त भी थे।इनके बारे में कहा जाता है कि बाबाजी को हनुमानजी के दर्शन हुआ करते थे।एक बार बाबाजी ने हनुमानजी से कहा महाराज! आप एकदिन सब लोगों को दर्शन दें ।हनुमानजी ने कहा कि ' तुम लोगों को इकट्ठा करो तथा शुद्ध हरिकथा करना , मैं वहीं सभी लोगों को मैं दर्शन दे दूँगा।' बाबाजी बोले ऐसा ही होगा।

          संत तथा राजगुरू होने के कारण बाबाजी का ऐसा प्रभाव था कि जहाँ भी जाते , वहीं हजारों की संख्या मे लोग इकट्ठे हो जाते।बाबाजी ने कहा आज रात शहर के बाहर अमुक मैदान में हरिकथा होगी।यह समाचार सुनते ही हरिकथा की तैयारी जोर-शोर से शुरू हो गई।दरियाँ तथा प्रकाश की व्यवस्था की गई।सब गाने -बजाने बाले आकर बैठ गये।लोगों की भीड़ जमा हो गई।समय पर बाबाजी कीर्तन प्रारम्भ कर दिये।बीच-बीच में भगवान की कथा भी बाबाजी कर देते फिर कीर्तन करने लगते । ऐसा करते करते , कीर्तन में बाबाजी इस कदर मस्त हो गये कि हरिकथा करना ही भूल गये।लोगों को आशा थी कि बाबाजी अब कथा सुनायेंगे , पर वे तो कीर्तन करते चले गये।लोगों के भीतर असली भाव तो था नहीं , अत: उन्होंने सोंचा कि कीर्तन तो हम घर पर स्वयं कर लेंगे ,यहाँ कबतक बैठे रहें! ऐसा सोंचकर वे धीरे-धीरे उठकर जाने लगे।थोड़ी देर मे सभी लोग उठकर चले गये।धीरे-धीरे गाने बजाने वाले भी चले गये।बाबाजी अपनी आँखे बन्द कर कीर्तन करने मे मस्त थे।प्रकाश की ब्यवस्था करने वाले भी चले गये।अब दरीवालों को परेशानी थी, कि बाबाजी दरी पर ही मस्ती से नाच रहे हैं,उन्हें हटाकर दरी कैसे समेटे? फिर उन्होंने दिमाग लगाया,जब बाबाजी नाचते-नाचते दूसरी तरफ जाते तो दरीवाले इधर की तरफ का दरी समेट लेते और जब बाबाजी नाचते-नाचते इधर आते तो दरी उधर की समेट लेते।इस तरह दरीवाले भी दरियाँ लेकर चले गये।जब सभी चले गये,तब हनुमानजी प्रकट हो गये।

बाबाजी ने हनुमानजी से कहा कि महाराज ! आप सबको दर्शन दें।हनुमानजी ने कहा ,यहाँ है ही कौन ? यहाँ तो मुझे सिर्फ आपही दिख रहे हैं।बाबाजी उदास हो गये ।इस प्रकार भावपूर्ण भगवन्नाम का संकीर्तन करना ही शुद्ध हरिकथा है।और शुद्ध हरिकथा से भगवान् साक्षात प्रकट हो जाते हैं।यदि मन में भगवान् के प्रति सच्ची भावना होती तो बाबाजी की कृपा से सभी को हनुमानजी का साक्षात् दर्शन हो जाता ।

                          जय श्रीराम , जय हनुमान ।