Swayam me anekon kamiyan hone ke bavjood mai apne aap se itna pyaar kar sakta hun

to fir doosron me thodi bahut kamiyon ko dekhkar unse ghrina kaisi kar sakta hun-

anmol vachan, Swami Vivekanand Ji


Tuesday, 7 March 2017

संत कृपा से भव पार।




    




समर्थ गुरु रामदास बाबा एक सच्चे संत तथा हनुमानजी के भक्त भी थे।इनके बारे में कहा जाता है कि बाबाजी को हनुमानजी के दर्शन हुआ करते थे।एक बार बाबाजी ने हनुमानजी से कहा महाराज! आप एकदिन सब लोगों को दर्शन दें ।हनुमानजी ने कहा कि ' तुम लोगों को इकट्ठा करो तथा शुद्ध हरिकथा करना , मैं वहीं सभी लोगों को मैं दर्शन दे दूँगा।' बाबाजी बोले ऐसा ही होगा।

          संत तथा राजगुरू होने के कारण बाबाजी का ऐसा प्रभाव था कि जहाँ भी जाते , वहीं हजारों की संख्या मे लोग इकट्ठे हो जाते।बाबाजी ने कहा आज रात शहर के बाहर अमुक मैदान में हरिकथा होगी।यह समाचार सुनते ही हरिकथा की तैयारी जोर-शोर से शुरू हो गई।दरियाँ तथा प्रकाश की व्यवस्था की गई।सब गाने -बजाने बाले आकर बैठ गये।लोगों की भीड़ जमा हो गई।समय पर बाबाजी कीर्तन प्रारम्भ कर दिये।बीच-बीच में भगवान की कथा भी बाबाजी कर देते फिर कीर्तन करने लगते । ऐसा करते करते , कीर्तन में बाबाजी इस कदर मस्त हो गये कि हरिकथा करना ही भूल गये।लोगों को आशा थी कि बाबाजी अब कथा सुनायेंगे , पर वे तो कीर्तन करते चले गये।लोगों के भीतर असली भाव तो था नहीं , अत: उन्होंने सोंचा कि कीर्तन तो हम घर पर स्वयं कर लेंगे ,यहाँ कबतक बैठे रहें! ऐसा सोंचकर वे धीरे-धीरे उठकर जाने लगे।थोड़ी देर मे सभी लोग उठकर चले गये।धीरे-धीरे गाने बजाने वाले भी चले गये।बाबाजी अपनी आँखे बन्द कर कीर्तन करने मे मस्त थे।प्रकाश की ब्यवस्था करने वाले भी चले गये।अब दरीवालों को परेशानी थी, कि बाबाजी दरी पर ही मस्ती से नाच रहे हैं,उन्हें हटाकर दरी कैसे समेटे? फिर उन्होंने दिमाग लगाया,जब बाबाजी नाचते-नाचते दूसरी तरफ जाते तो दरीवाले इधर की तरफ का दरी समेट लेते और जब बाबाजी नाचते-नाचते इधर आते तो दरी उधर की समेट लेते।इस तरह दरीवाले भी दरियाँ लेकर चले गये।जब सभी चले गये,तब हनुमानजी प्रकट हो गये।

बाबाजी ने हनुमानजी से कहा कि महाराज ! आप सबको दर्शन दें।हनुमानजी ने कहा ,यहाँ है ही कौन ? यहाँ तो मुझे सिर्फ आपही दिख रहे हैं।बाबाजी उदास हो गये ।इस प्रकार भावपूर्ण भगवन्नाम का संकीर्तन करना ही शुद्ध हरिकथा है।और शुद्ध हरिकथा से भगवान् साक्षात प्रकट हो जाते हैं।यदि मन में भगवान् के प्रति सच्ची भावना होती तो बाबाजी की कृपा से सभी को हनुमानजी का साक्षात् दर्शन हो जाता ।

                          जय श्रीराम , जय हनुमान ।