Swayam me anekon kamiyan hone ke bavjood mai apne aap se itna pyaar kar sakta hun

to fir doosron me thodi bahut kamiyon ko dekhkar unse ghrina kaisi kar sakta hun-

anmol vachan, Swami Vivekanand Ji


Saturday, 1 April 2017

Ma Durga ka Chhatha Roop 'Ma Katyayani'माँ दुर्गा का छठा रूप ' माँ कात्यायनी'

नवरात्र के छठे दिन दुर्गाजी के छठे स्वरूप माँ कात्यायनी की पूजा और अर्चना की जाती है।ऐसा विश्वास है कि इनकी उपासना करने से अर्थ , धर्म , काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है।माँ ने कात्य गोत्र के महर्षि कात्यायन के यहाँ पुत्री रूप में जन्म लिया,इसलिए इनका नाम कात्यायनी पड़ा।इनका रंग स्वर्ण की भांति अत्यन्त चमकीला है और इनकी चार भुजायें हैं।
               इनकी दाईं ओर के ऊपर वाला हाथ अभय मुद्रा में है और नीचे वाला हाथ वर मुद्रा में।बाईं ओर के ऊपर वाले हाथ में खड़ग अर्थात तलवार है और नीचे वाले हाथ में कमल का फूल है।इनका वाहन भी सिंह है।
     शास्त्रों में ऐसा उल्लेख मिलता है कि महर्षि कात्यायन ने सर्वगुण संपन्न पुत्री पाने के उद्देश्य से भगवती पराम्बा की कठिन तपस्या की और इन्हें पुत्री के रूप में कात्यायनी की प्राप्ति हुई।क्योंकि ये ब्रजभूमि की अधिष्ठात्री देवी के रूप में प्रतिष्ठित हैं, संभवत: इसलिए ब्रज प्रदेश की गोपियों ने भगवान कृष्ण को पति रूप में पाने के लिये यमुना तट पर इन्हीं माँ कात्यायनी की पूजा की थी।
     इनके पूजन में शहद का विशेष महत्व बताया गया है।इसलिय इन्हें मधु का भोग लगाया जाता है।इनके उपासक को किसी प्रकार का कोई भय नहीं रहता है और वह सब तरह के पापों से मुक्त हो जाता है।इन्हें शोध की देवी कहा जाता है।उच्च शिक्षा प्राप्त करने वालों को इनकी पूजा अवश्य करनी चाहिये।इनकी पूजा अर्चना तथा स्तवन निम्न मन्त्र से किया जाता है।

                   चन्द्रहासोज्जवलकरा , शार्दूलवरवाहना ।
                    कात्यायनी शुभं दद्यात् , देवी दानवघातनी।।
अर्थात् चन्द्रहास की भाँति देदीप्यमान , शार्दूल अर्थात शेर पर सवार और दानवों का विनाश करने वाली माँ कात्यायनी हम सबके लिये शुभदायी हों।